Navnath Mantra

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नाथ सम्प्रदाय में जन्म-मृत्यु से परे स्वयंभू/अयोनिज नवनाथ स्वरूप नौ आदि योगी नाथ/गुरु विशेष आदरणीय हैं।

1.  आदिनाथ- अवकाश काल ज्योति स्वरुप महाकाल आदिनाथ (शिवरात्रि)

2.  प्राणनाथ अर्धनारीश्वर स्वरूप अचल-अचम्भे प्राणनाथ (महा-शिवरात्रि)

3.  उदयनाथ- प्रकृति स्वरुप महाशक्ति अम्बिका उदयनाथ (नवरात्रि)

4.  संतोषनाथ- जीवन-साध्य कर्म-साधन स्वरुप संतोषनाथ (कार्तिक-पूर्णिमा)                            

5.  सत्यनाथ- जल स्वरुप स्रष्टि-सर्जक अधिपति सत्यनाथ (बसंत-पंचमी)

6.  कंथड़नाथ नैतिक कर्तव्य धारणा धर्म स्वरुप कंथड़नाथ (गणेश-चतुर्थी)

7.  मत्स्येन्द्रनाथ- माया स्वरुप दादा गुरु मछन्द्रनाथ (गुरु-पूर्णिमा)

8.  गोरक्षनाथ- योग तत्व जति स्वरुप गुरु गोरक्षनाथ (वैशाख-पूर्णिमा)

9.  ज्ञाननाथ ज्ञान स्वरुप ज्ञान-पारखी चौरन्गी बुद्धनाथ (योग-दिवस)

नवनाथ ध्यान/जाप मंत्र:

ॐ नम: आदेश.! सत नमो आदेश..!! आदेश नवनाथ गुरुजी को…!!!

|| ॐ नमो आदेश अवकाश काल रूप अलख निरंजन महाकाल ॐ-कार आदिनाथ, भगवान स्वरूप अचल-अचम्भे प्राणनाथ, प्राकट्य शक्ति स्वरुप अम्बिका उदयनाथ, जल रूप सत्यनाथ, धर्म स्वरुप कंथड़नाथ, कर्म साधन स्वरुप संतोषनाथ, माया रूप दादा गुरु श्री मछन्द्रनाथ, घटे पिंड निरंतर शम्भु-जति गुरु गोरक्षनाथ, चौरंगी ज्ञान-पारखी सिद्ध बुद्धनाथ और चौरासी सिद्धों के चरणों में आदेश, आदेश नमो नम: ||

विधि- इस मंत्र का जाप पुर्ण विश्वास और श्रद्धा के साथ रुद्राक्ष माला से शुरु करें तो, साधक सुख-सम्पत्ति और वैभव (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, आदि) को प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है। मंत्र जाप से पुर्व गुरु और गणेश स्मरण अवश्य करे, साथ मे हो सके तो “ॐ नमः शिवाय” का भी जाप करें और शिवलिंग का पुजन भी करें। सबसे पहले किसी साफ़ जगह पर थोड़ा जल छिडक लें। फिर कलश में शुद्ध जल भरकर उसके ऊपर नारियल रख दें। फिर बैठकर एक लोहे का किल लेकर अपने चारो और गोल घेर का सुरक्षा कवच बना ले। फिर पूर्व या उत्तर दिशा (भौतिक कार्य के लिए पूर्व और आध्यात्मिक लक्ष्य के लिए उत्तर श्रेष्ठ) की ओर मुंह कर बैठ जाएं। सामने हवन कुंड रखें। आम की लकड़ी मिल सके तो बेहतर नहीं तो अन्य लकड़ी से भी काम चलाया जा सकता है। इसके बाद ‘आदेश नव-नाथ चौरासी सिद्धों को आदेश’ मंत्र बोलते हुए अष्टगंध से मिश्रित चावल को दसो दिशा मे एक-एक बार मंत्र बोलते हुए चावल छीडककर, दशो दिशाओं को बांधना है। ताकि साधना मे कोई बाधा उत्पन्न ना हो। फिर एक लकड़ी की चौकी (पटरी) के ऊपर एक साफ पात्र में घी एवं घी देने के लिए सुरुप (चम्मच), हवन-सामग्री और एक थाली में नौ पान के पत्ते और पत्ते के उपर चावल की नौ ढेरियाँ बनाकर उन पर नवनाथों के प्रतीक-रुप में नौ सुपारियाँ मौली बाँधकर, नौ दीपक, पान के पत्ते पे एक-एक सुपारी लौंग, इलाइची, पतासे और रूपया या सिक्का रख दें। दीपक में घी या मीठा तेल डाल कर धूप बत्ती लगाकर, एक-एक बार ‘आदेश नव-नाथ चौरासी सिद्धों को आदेश’ पढ़ते हुए दीपकों को एक-एक कर जलाये और फिर फल और फूल रख के नव-नाथ स्वरुप का ध्यान कर नवनाथ-शाबर-मन्त्र का जप करें। हवन कुंड में तीन छोटी लकड़ी से अपनी ओर नोंक वाला त्रिकोण बनाएं। इसके बाद अग्नि प्रज्वलित करें। हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित करने के पश्चात, इस पवित्र अग्नि में फल, शहद, घी, काष्ठ इत्यादि पदार्थों की आहुति प्रमुख होती है। मंत्र का 108 बार जाप करना है। बभुत पर मंत्र को 11 बार पढकर 3 फुंक लगाये। बभुत को जिस पर तंत्र बाधा हो उसके माथे पर लगा दें तो, पीडित के कष्ट दुर हो जायेगा। इस दौरान ब्रह्मचर्य से रहे, अन्य के हाथों का भोजन या अन्य खाद्य-वस्तुएँ ग्रहण न करे, अर्थात् स्वपाकी रहें।

नवनाथ शाबर मन्त्र“ॐ गुरुजी, सत नमः आदेश। गुरुजी को आदेश। ॐकारे शिव-रुपी, मध्याह्ने हंस-रुपी, सन्ध्यायां साधु-रुपी। हंस, परमहंस दो अक्षर। गुरु तो गोरक्ष, काया तो गायत्री। ॐ ब्रह्म, सोऽहं शक्ति, शून्य माता, अवगत पिता, विहंगम जात, अभय पन्थ, सूक्ष्म-वेद, असंख्य शाखा, अनन्त प्रवर, निरञ्जन गोत्र, त्रिकुटी क्षेत्र, जुगति जोग, जल-स्वरुप रुद्र-वर्ण। सर्व-देव ध्यायते। आए श्री शम्भु-जति गुरु गोरखनाथ। ॐ सोऽहं तत्पुरुषाय विद्महे शिव गोरक्षाय धीमहि तन्नो गोरक्षः प्रचोदयात्। ॐ इतना गोरख-गायत्री-जाप सम्पूर्ण भया। गंगा गोदावरी त्र्यम्बक-क्षेत्र कोलाञ्चल अनुपान शिला पर सिद्धासन बैठ। नव-नाथ, चौरासी सिद्ध, अनन्त-कोटि-सिद्ध-मध्ये श्री शम्भु-जति गुरु गोरखनाथजी कथ पढ़, जप के सुनाया। सिद्धो गुरुवरो, आदेश-आदेश।।” नवनाथ-स्तुति“आदि-नाथ कैलाश-निवासी, उदय-नाथ काटै जम-फाँसी। सत्य-नाथ सारनी सन्त भाखै, सन्तोष-नाथ सदा सन्तन की राखै। कन्थडी-नाथ सदा सुख-दाई, अञ्चति अचम्भे-नाथ सहाई। ज्ञान-पारखी सिद्ध चौरङ्गी, मत्स्येन्द्र-नाथ दादा बहुरङ्गी। गोरख-नाथ सकल घट-व्यापी, काटै कलि-मल, तारै भव-पीरा। नव-नाथों के नाम सुमिरिए, तनिक भस्मी ले मस्तक धरिए। रोग-शोक-दारिद नशावै, निर्मल देह परम सुख पावै। भूत-प्रेत-भय-भञ्जना, नव-नाथों का नाम। सेवक सुमरे चन्द्र-नाथ, पूर्ण होंय सब काम।।” विधिः- प्रतिदिन नव-नाथों का पूजन कर उक्त स्तुति का २१ बार पाठ कर मस्तक पर भस्म लगाए। इससे नवनाथों की कृपा मिलती है। साथ ही सब प्रकार के भय-पीड़ा, रोग-दोष, भूत-प्रेत-बाधा दूर होकर मनोकामना, सुख-सम्पत्ति आदि अभीष्ट कार्य सिद्ध होते हैं। २१ दिनों तक, २१ बार पाठ करने से सिद्धि होती है। नवनाथ-शाबर-मन्त्र“ॐ नमो आदेश गुरु की। ॐकारे आदि-नाथ, उदय-नाथ पार्वती। सत्य-नाथ ब्रह्मा। सन्तोष-नाथ विष्णुः, अचल अचम्भे-नाथ। गज-बेली गज-कन्थडि-नाथ, ज्ञान-पारखी चौरङ्गी-नाथ। माया-रुपी मच्छेन्द्र-नाथ, जति-गुरु है गोरख-नाथ। घट-घट पिण्डे व्यापी, नाथ सदा रहें सहाई। नवनाथ चौरासी सिद्धों की दुहाई। ॐ नमो आदेश गुरु की।।”
विधिः- पूर्णमासी से जप प्रारम्भ करे। जप के पूर्व चावल की नौ ढेरियाँ बनाकर उन पर ९ सुपारियाँ मौली बाँधकर नवनाथों के प्रतीक-रुप में रखकर उनका षोडशोपचार-पूजन करे। तब गुरु, गणेश और इष्ट का स्मरण कर आह्वान करे। फिर मन्त्र-जप करे। प्रतिदिन नियत समय और निश्चित संख्या में जप करे। ब्रह्मचर्य से रहे, अन्य के हाथों का भोजन या अन्य खाद्य-वस्तुएँ ग्रहण न करे। स्वपाकी रहे। इस साधना से नवनाथों की कृपा से साधक धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष को प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है। उनकी कृपा से ऐहिक और पारलौकिक-सभी कार्य सिद्ध होते हैं।विशेषः-’शाबर-पद्धति’ से इस मन्त्र को यदि ‘उज्जैन’ की ‘भर्तृहरि-गुफा’ में बैठकर ९ हजार या ९ लाख की संख्या में जप लें, तो परम-सिद्धि मिलती है और नौ-नाथ प्रत्यक्ष दर्शन देकर अभीष्ट वरदान देते हैं।  नव-नाथ-स्मरण“आदि-नाथ ओ स्वरुप, उदय-नाथ उमा-महि-रुप। जल-रुपी ब्रह्मा सत-नाथ, रवि-रुप विष्णु सन्तोष-नाथ। हस्ती-रुप गनेश भतीजै, ताकु कन्थड-नाथ कही जै। माया-रुपी मछिन्दर-नाथ, चन्द-रुप चौरङ्गी-नाथ। शेष-रुप अचम्भे-नाथ, वायु-रुपी गुरु गोरख-नाथ। घट-घट-व्यापक घट का राव, अमी महा-रस स्त्रवती खाव। ॐ नमो नव-नाथ-गण, चौरासी गोमेश। आदि-नाथ आदि-पुरुष, शिव गोरख आदेश। ॐ श्री नव-नाथाय नमः।।”
विधिः- उक्त स्मरण का पाठ प्रतिदिन करे। इससे पापों का क्षय होता है, मोक्ष की प्राप्ति होती है। सुख-सम्पत्ति-वैभव से साधक परिपूर्ण हो जाता है। २१ दिनों तक २१ पाठ करने से इसकी सिद्धि होती है। 

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